1 February 2014

तुम्हे मुहतात होना चाहिए था - फ़हमी बुदाउनी

तुम्हे मुहतात होना चाहिए था
बगैर अश्कों के रोना चाहिए था

मिरी वादा-खिलाफी पर वो चुप हैं
उसे नाराज़ होना चाहिए था

हमारा हाल तुम भी पूछते हो
तुम्हे मालूम होना चाहिए था

अब उसको याद करके रो रहा हूँ
बिछड़ते वक़्त रोना चाहिए था

चला आता यकीनन ख्वाब में वो
हमें कल रात सोना चाहिए था

पड़ा था इश्क में पहला भंवर जब

वहीँ कश्ती डुबोना चाहिए था......

फ़हमी बुदाउनी

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काव्य गुरु
प्रात: स्मरणीय परमादरणीय कविरत्न स्व. श्री यमुना प्रसाद चतुर्वेदी 'प्रीतम' जी

काव्य गुरु <br>प्रात: स्मरणीय परमादरणीय कविरत्न स्व. श्री यमुना प्रसाद चतुर्वेदी 'प्रीतम' जी
जन्म ११ मई १९३१
हरि शरण गमन १४ मार्च २००५

My Bread and Butter

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