26 November 2013

एक लाइन में आउते बालक - नवीन

एक लाइन में आउते बालक
एक लाइन में जाउते बालक

धूर-मट्टी उड़ाउते बालक
मैल मन कौ मिटाउते बालक

लौट सहरन सूँ आउते बालक
जोत की लौ बचाउते बालक

बन सकतु ऐ नसीब धरती पै
देख पढ़ते-पढाउते बालक

रूस बैठी गरूर की गुम्बद
गुलगुली सूँ मनाउते बालक

किस्न बन कें जसोदा मैया कूँ
ता-ता थैया नचाउते बालक

कितनी टीचर कितेक रिस्तेदार
सब की सब सूँ निभाउते बालक

घर की दुर्गत हजम न कर पाये
हँस कें पत्थर पचाउते बालक

और एक दिन असान्त ह्वे ई गये
सोर कब लौं मचाउते बालक


[भाषा धर्म के अधिकतम निकट रहते हुये भावार्थ-गजल ]
आउते - आते हुये, जाउते - जाते हुये - इस तरह से क्रिया शब्दों को पढ़ने की कृपा करें। 
अन्तिम शेर के मचाउते को 'कब तक शोर मचाते' के अभिप्राय के साथ पढ़ें।


एक लाइन में आउते बालक
एक लाइन में जाउते बालक

धूर-मट्टी उड़ाउते बालक
मैल मन कौ मिटाउते बालक

लौट शहरों से आउते बालक
जोत की लौ बचाउते बालक

बन सके है नसीब धरती पर
देख, पढ़ते-पढाउते बालक

रूठ बैठी गरूर की गुम्बद
गुलगुली से मनाउते बालक

किस्न बन के जसोदा मैया को
ता-ता थैया नचाउते बालक

कितनी टीचर कितेक [कितने सारे] रिस्तेदार
सब की सब से निभाउते बालक

घर की दुर्गत हजम न कर पाये
हँस के पत्थर पचाउते बालक

और एक दिन असान्त हो ही गये
सोर कब तक मचाउते [मचाते] बालक


:- नवीन सी. चतुर्वेदी

5 comments:

  1. बहुत -बहुत ही सुन्दर बालक

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  2. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति बुधवारीय चर्चा मंच पर ।।

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  3. उम्दा...बहुत बहुत बधाई...

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  4. कैसी सुघर ग़ज़ल भैया ,वैसी ही सुघर भासा ऊ अरु बालक हू ...वाह वाह ...

    कैसी सुघर ग़ज़ल सुनाउते नवीन
    बालक हू कैसे होवत भये प्रवीन |.

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