5 October 2019

विष्णु की विराटता में शारदे कौ वास है - नवीन चतुर्वेदी

थके भए मानव की थकन मिटान हारी,
सिन्धु की सरलता में शारदे कौ वास है।

अग्नि-वर्णा धातु धार शीतल हॄदय होंय, 
स्वर्ण की विविधता में शारदे कौ वास है।

सत्य, शान्ति, शील, धैर्य मातु शारदे की दैन,
प्रति एक शुचिता में शारदे कौ वास है।

कल्पना विहीन विश्व कैसें विसतार पातो,
विष्णु की विराटता में शारदे कौ वास है।। 

नवीन सी चतुर्वेदी 

सरस्वती वन्दना, घनाक्षरी छन्द

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