26 March 2012

आदमी का पता नहीं कोई - राजेन्द्र स्वर्णकार

   
ठाले बैठे परिवार से अभिन्न रूप से जुड़े हमारे स्नेही राजेन्द्र भाई से लगभग हर ब्लॉगर  परिचित है।  पहली बार उन्होंने  एक ग़ज़ल की मार्फ़त वातायन की सूची को सुशोभित किया है ।स्वागत है बड़े भाई !




ढूँढता हूँ , मिला नहीं कोई
आदमी का पता नहीं कोई

नक़्शे-पा राहे-सख़्त पर न मिले
याँ से होक्या चला नहीं कोई

कल बदल जाएगी हर इक सूरत
देर तक याँ रहा नहीं कोई

आइनों से न यूँ ख़फ़ा होना
सच में उनकी ख़ता नहीं कोई

हर घड़ी जो ख़ुदा ख़ुदा करता
उसका सच में ख़ुदा नहीं कोई

आज इनआम मिल रहे इनको
क़ातिलों को सज़ा नहीं कोई

दिल का काग़ज़ अभी भी कोरा है
नाम उस पर लिखा नहीं कोई

शाइरी से भी दिल लगा देखा
कुछ भी हासिल हुआ नहीं कोई

वो तो राजेन्द्र यूं ही बकता है
उससे होना ख़फ़ा नहीं कोई
-राजेन्द्र स्वर्णकार
©copyright by : Rajendra Swarnkar


बहरे खफ़ीफ मुसद्दस मखबून
फाएलातुन मुफ़ाएलुन फालुन
2122 1212 22

13 comments:

  1. हर घड़ी जो ख़ुदा ख़ुदा करता
    उसका सच में ख़ुदा नहीं कोई... वाह!
    बहुत खूबसूरत ग़ज़ल राजेंद्र जी..

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  2. वाह..........

    आइनों से न यूँ ख़फ़ा होना
    सच में उनकी ख़ता नहीं कोई

    बहुत खूबसूरत...
    सादर.

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  3. वाह भाई वाह ।
    हर शेर दहाड़ता हुआ ।
    बधाई ।।

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  4. कल बदल जाएगी हर इक सूरत
    देर तक याँ रहा नहीं कोई

    ....बेहतरीन गज़ल..

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  5. आइनों से न यूँ ख़फ़ा होना
    सच में उनकी ख़ता नहीं कोई
    बहुत खूबसूरत है भाई साहब हरेक अश आर अपनी अलग रवायत लिए हुए ,मजा आ गया .

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  6. "आइनों से न यूँ ख़फ़ा होना
    सच में उनकी ख़ता नहीं कोई"

    वाह! राजेन्द्र भाई वाह! क्या बेहतरीन बात और बेबाक और सरल अन्दाज़.. वाह!

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  7. आइनों से न यूँ ख़फ़ा होना
    सच में उनकी ख़ता नहीं कोई

    बहुत खूबसूरत...

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  8. बहुत खूब, काश कोई मिल जाता।

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  9. आइनों से न यूँ ख़फ़ा होना
    सच में उनकी ख़ता नहीं कोई

    हर घड़ी जो ख़ुदा ख़ुदा करता
    उसका सच में ख़ुदा नहीं कोई
    bahut khub janab........behtreen ashaar ......

    Hadi Javed

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  10. कल बदल जाएगी हर इक सूरत
    देर तक याँ रहा नहीं कोई

    आइनों से न यूँ ख़फ़ा होना
    सच में उनकी ख़ता नहीं कोई
    .. "Gungunaataa ja raha tha ik Faqeer... Dhoop rahti hai na Saya deir tak".... aur Aaayine to wahi dikhaate hain JO UNKO DIKHTA HAI>>> YAANI MERI APNI SHAKAL..... khooob

    AbdurRahman Aazmi

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  11. बहुत अच्छी गज़ल ... बधाई।

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  12. आइनों से न यूँ ख़फ़ा होना
    सच में उनकी ख़ता नहीं कोई

    कोई शक़ नहीं कि इस साक्षी शेर को कहने वाला शायर कितना ज़िन्दामन है.
    साफ़गोई के इन जज़्बात को मेरा प्रणाम.

    विश्वास है, आप भाई राजेंद्रजी तक मेरे हार्दिक वचन पहुँचा देंगे.

    सादर
    -सौरभ पाण्डेय, नैनी, इलाहाबाद (उप्र)

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