1 June 2014

4 भोजपुरी गजलें - इरशाद खान सिकन्दर



कई शब्द लिखि लिखि के काटल रहे
तबो गम न रचना में आँटल रहे

भरल दुःख के गगरी से घर बा भरल
एही से त मनवा उचाटल रहे

मिलन,बेवफाई,जुदाई,तड़प
सफर केतना हिस्सा में बाँटल रहे

कहीं का कहानी ल एतने समझ
मोहब्बत के पन्ना भी फाटल रहे

‘सिकन्दर’ के कोशिश भइल ना सफल
कि नेहिया से धरती ई पाटल रहे


बहरे मुतक़ारिब मुसम्मन मक़्सूर
फ़ऊलुन फ़ऊलुन फ़ऊलुन फ़उल
122 122 122 12



दिल में हलचल मचवले बा काहो
चाँद पागल बनवले बा काहो

एतना बेकल तू कहँवा जातारा
केहू अँखिया बिछौले बा काहो

तू अकेले में मुस्कुरातारा
फूल बिजली गिरवले बा काहो

पाँव थिरके के समझीं का मतलब
नाच नेहिया नचवले बा काहो

काहे अइसे चिहुँक के उठ गइला
नींद, सपना उड़वले बा काहो


बहरे खफ़ीफ मुसद्दस मख़बून
फ़ाइलातुन मुफ़ाइलुन फ़ेलुन
2122 1212 22



ख्वाहिश बा कवनो अइसने जादू देखाई दे
हम देखीं आइना त उहे ऊ देखाई दे

अइसे ऊ हमरा याद में आवस कबो कबो
जइसे अन्हरिया रात में जुगनू देखाई दे

अइसे भी ज़िंदगी में त आवेला केतना लोग
जइसे केहू के आँखि में आँसू देखाई दे

बाटे हो रोम-रोम में खुशबू वो फूल के
चाहेला मन कि सामने खुशबू देखाई दे

पावे करार कइसे ई मोर  बेकरार दिल
कवनो न उनके दीद के पहलू देखाई दे


बहरे मज़ारिअ मुसमन अख़रब मकफूफ़ मकफूफ़ महज़ूफ़
मफ़ऊलु फ़ाइलातु  मुफ़ाईलु फ़ाइलुन
221 2121 1221 212



कोरे कागज पे प्यार लिखि लिखि के
ऊ मिटावेला  यार लिखि लिखि के

रास आ गइल बाटे पतझड़ का
काट देला बहार लिखि लिखि के

चाँदनी रात के बिछौना पर
सुत गइल ऊ अन्हार लिखि लिखि के

आज ले कुछ जवाब ना आइल
चिट्ठी भेजनीं हजार लिखि-लिखि के

चल ‘सिकन्दर’ तें काहें रोवेले
दुःख के बोझा उतार लिखि लिखि के


बहरे खफ़ीफ मुसद्दस मख़बून
फ़ाइलातुन मुफ़ाइलुन फ़ेलुन
2122 1212 22



इरशाद खान सिकन्दर

9818354784

3 comments:

  1. wah....bahut khub...aur hamare irshad sahaab...sahitya aur shayri jagat ke badshah hai.....

    ReplyDelete
  2. wah....bahut khub...aur hamare irshad sahaab...sahitya aur shayri jagat ke badshah hai.....

    ReplyDelete
  3. वाह रऊवा आपन बोली म गजबै ढ दिए भोजपुरी माई तोहरा खातिर गंगा मईया से गुहार करल

    ReplyDelete

नई पुरानी पोस्ट्स ढूँढें यहाँ पर

काव्य गुरु
प्रात: स्मरणीय परमादरणीय कविरत्न स्व. श्री यमुना प्रसाद चतुर्वेदी 'प्रीतम' जी

काव्य गुरु <br>प्रात: स्मरणीय परमादरणीय कविरत्न स्व. श्री यमुना प्रसाद चतुर्वेदी 'प्रीतम' जी
जन्म ११ मई १९३१
हरि शरण गमन १४ मार्च २००५

My Bread and Butter

यहाँ प्रकाशित सभी सामग्री के सभी अधिकार / दायित्व तत्सम्बन्धित लेखकाधीन हैं| अव्यावसायिक प्रयोग के लिए स-सन्दर्भ लेखक के नाम का उल्लेख अवश्य करें| व्यावसायिक प्रयोग के लिए पूर्व लिखित अनुमति आवश्यक है|

साहित्यम पर अधिकान्शत: छवियाँ साभार गूगल से ली जाती हैं। अच्छा-साहित्य अधिकतम व्यक्तियों तक पहुँचाने के प्रयास के अन्तर्गत विविध सामग्रियाँ पुस्तकों, अनतर्जाल या अन्य व्यक्तियों / माध्यमों से सङ्ग्रहित की जाती हैं। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री पर यदि किसी को किसी भी तरह की आपत्ति हो तो अपनी मंशा विधिवत सम्पादक तक पहुँचाने की कृपा करें। हमारा ध्येय या मन्तव्य किसी को नुकसान पहुँचाना नहीं है।