1 February 2014

खोया-खोया चाँद भी - फणीन्द्र कुमार ‘भगत’

खोया-खोया चाँद भी, गया रूठकर आज |
तारा टूटे तार का, कहाँ बजाता साज ||
कहाँ बजाता साज, घने घुप अँधियारे में,
या खुद रोता आज, चाँद के चौबारे में,
जागा सारी रात, नहीं वह तारा सोया,
गया रूठ जब प्यार, चाँद सा खोया-खोया ||


~ फणीन्द्र कुमार ‘भगत’

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काव्य गुरु
प्रात: स्मरणीय परमादरणीय कविरत्न स्व. श्री यमुना प्रसाद चतुर्वेदी 'प्रीतम' जी

काव्य गुरु <br>प्रात: स्मरणीय परमादरणीय कविरत्न स्व. श्री यमुना प्रसाद चतुर्वेदी 'प्रीतम' जी
जन्म ११ मई १९३१
हरि शरण गमन १४ मार्च २००५

My Bread and Butter

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