30 November 2014

पहले तो हम को पंख हवा ने लगा दिये - नवीन

पहले तो हम को पंख हवा ने लगा दिये
और फिर हमारे पीछे फ़साने लगा दिये

दुनिया हमारे नूर से वैसे भी दड़्ग थी
और उस पे चार-चाँद पिया ने लगा दिये

तारे बेचारे ख़ुद भी सहर के हैं मुन्तज़िर
सूरज ने उगते-उगते ज़माने लगा दिये

ऐ कारोबारे-प्यार ख़सारा ही कुछ उतार
साँसों ने बेशुमार ख़ज़ाने लगा दिये

कुछ यूँ समय की जोत ने रौशन किये दयार
हम जैसे बे-ठिकाने ठिकाने लगा दिये

कमज़ोर याददाश्त को मज़बूत यूँ किया

यादों के इर्द-गिर्द तराने लगा दिये

:- नवीन सी. चतुर्वेदी 

बहरे मज़ारिअ मुसमन अख़रब मकफूफ़ मकफूफ़ महज़ूफ़
मफ़ऊलु फ़ाइलातु  मुफ़ाईलु फ़ाइलुन
 221 2121 1221 212

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काव्य गुरु
प्रात: स्मरणीय परमादरणीय कविरत्न स्व. श्री यमुना प्रसाद चतुर्वेदी 'प्रीतम' जी

काव्य गुरु <br>प्रात: स्मरणीय परमादरणीय कविरत्न स्व. श्री यमुना प्रसाद चतुर्वेदी 'प्रीतम' जी
जन्म ११ मई १९३१
हरि शरण गमन १४ मार्च २००५

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