21 May 2013

हमीं तनहा नहीं हैं आसमाँ पर - नवीन

नया काम


हमीं तनहा नहीं हैं आसमाँ पर
कई टूटे हुये दिल हैं यहाँ पर



किसी की रूह प्यासी रह न जाये
लिहाज़ा दर्द बरसे है जहाँ पर



अमाँ हम भी  किरायेदार ही हैं
भले ही नाम लिक्खा है मकाँ पर



बहारों के लिये मुश्किल घड़ी है
अज़ाब उतरे हैं एक-एक बागवाँ पर



बहुत कुछ याद आ जायेगा फिर से
न रक्खें हाथ ज़ख़्मों के निशाँ पर



हमें जाना है बस पी की नगरिया
नज़र रक्खे हुये हैं कारवाँ पर



'नवीन'अब ख़ैर ही समझो तुम अपनी
वो देखो तीर नज़रों की कमाँ पर



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अजब सा हाल देखा आसमाँ पर
कई टूटे हुये दिल हैं वहाँ पर

बदन की प्यास की ख़ातिर है पानी
लिहाज़ा दर्द बरसे है जहाँ पर

किरायेदार से बढ़ कर नहीं हम
भले ही नाम लिक्खा है मकाँ पर

बहारों में ख़िज़ाएँ नाचती हैं
असर दिखता नहीं पर बागवाँ पर

हमें जाना है बस पी की नगरिया
नज़र रक्खे हुये हैं कारवाँ पर

: नवीन सी. चतुर्वेदी

बहरे हजज मुसद्दस महजूफ़
मुफ़ाईलुन मुफ़ाईलुन फ़ऊलुन

1222 1222 122

6 comments:

  1. किरायेदार से बढ़ कर नहीं हम
    भले ही नाम लिक्खा है मकाँ पर

    बहुत खूब सुंदर गज़ल

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  2. बेहतरीन प्रस्तुति ...

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  3. Well said. Good one . Plz visit my blog.

    ReplyDelete
  4. आपने लिखा....
    हमने पढ़ा....
    और लोग भी पढ़ें;
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