13 August 2016

जोस भरी जनता नें भारत की जेलें भरीं - भगवान दत्त चतुर्वेदी

फोटो में श्री भगवान दत्त जी के साथ लोकर्षि श्री राजेन्द्र रंजन जी [खड़े हुये]
श्री राजेन्द्र रंजन जी का युवावस्था का फोटो है यह

घनाक्षरी छन्द

लाखन की गिनती में जनता नें जेलें भरीं ,
तरस रहे हे कैदी वस्त्र-तसलान कों ।

डेरन में ढेरन कंटीले तार-घेरन में,
भेरन की भांति बंद कियौ इनसान कों।

रूखी दार-रोटिन की बात मत पूंछौ कछू,
तडप रहे हे कहूं कैदी जल-पान कों।

भूख सही प्यास सही गन्दगी की बास सही,
पै न तजी दासता निबारन की बान कों।


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जोस भरी जनता नें भारत की जेलें भरीं,
रेलें भरी बन्दिन के भारी यातायात सों।

होडाहोडी कोडा सहे , छातिन पै घोडा सहे,
रोडा कुटबाये गये छाले भरे हाथ सों।

हथकडी-बेडी सही, आंख-भोंह टेढी सहीं ,
भीत हू भये न रंच बंदी पद-घात सों ।

कष्ट कारागार के कठोर सों कठोर सहे ,
पै न हटे पीछें देशभक्त निज बात सों ।

स्व. श्री भगवानदत्त चतुर्वेदी

सौजन्य : श्री राजेन्द्र रंजन जी

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