8 October 2011

मची है ब्रज में होरी आज

मची है ब्रज में होरी आज

जमुना जल सों हौज भराए
केसर अतर गुलाब मिलाए
उत गुपियन नें लट्ठ उठाए
खूब सज्यौ है साज
मची है ब्रज में होरी आज

इत सों आए किसन मुरारी
हाथ लिएं रंगन पिचकारी
उत भागीं वृषभानु दुलारी
रसिकन की सरताज
मची है ब्रज में होरी आज

ब्रज वौ ही त्यौहार वही है
पर कां वैसी प्रीत रही है
सब नें यै ही बात कही है
डूबत 'लाज' जहाज
भली यै कैसी होरी आज

3 comments:

  1. आदरणीय सर,
    आपके हाइकुओं पर आधारित हाइगा हिन्दी-हाइगा ब्लॉग पर प्रकाशित हैं|अवलोकन करने की कृपा करें|लिंक नीचे है|

    http://hindihaiga.blogspot.com/

    सादर
    ऋता शेखर 'मधु'

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  2. अच्छी लगी रचना ..आज की होरी... शुभकामनाएं.

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  3. ऋता जी नमस्कार

    मैंने देखा, वह नवीन चतुर्वेदी मैं नहीं हूँ. और नहीं वो हाइकु मेरे हैं.
    वे कोइ और लगते हैं.

    यहाँ पधारने के लिए बहुत बहुत आभार

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