13 November 2013

बाकी तो अब तेंदुलकर का भी नसीब है - नवीन

सचिन सचिन सच्चिन सचिन, सचिन सचिन सच्चिन्न
दुनिया की किरकेट का, तुम हो भाग अभिन्न
तुम हो भाग अभिन्न, भिन्न है खेल तुम्हारा
खिन्न हुआ था वार्न, देख कर स्वप्न, बिचारा
आज तलक है याद, सचिन हमको वो मंज़र
'बच्चू' जिसने कहा, उसी को मारा सिक्सर

सचिन हमारा मान है, सचिन हमारी शान
सचिन तुम्हारे साथ है सारा हिन्दुस्तान
सारा हिन्दुस्तान, साँस थामे बैठा है
यही सभी की फ़िक्र, सचिन अब क्या करता है
कुछ पल कुछ इक बौल, देखना, नज़र बिठाना
फिर तो बस बिन्दास, तान कर शॉट लगाना

किस ने किस से किस तरह, किया सचिन का ज़िक्र
इन सब की अपना सचिन, कब करता है फ़िक्र
कब करता है फ़िक्र, सचिन तो रन-मशीन है
जिस के आगे गेंदबाज बस दीन-हीन है
तेन्दुलकर को गेंदबाज कर दे यदि आउट
बेचारा ख़ुद पर करने लगता है डाउट

अम्पायर सारे सभी हाँ सब के सब यार
तेन्दुलकर के खेल पर करते जान निसार
करते जान निसार विरोधी प्लेयर सारे
हाँ, वो सब, जिन को दिन में दिखलाये तारे
कुछ ने कुछ मौक़ों पर यूँ तो कोसा भी है
उस के बाद सचिन ने रंग दिखाया भी है

पूरे हिंदुस्तान को, करने को बेचैन
आखिर वो दिन आ गया,भीगेंगे जब नैन
भीगेंगे जब नैन सचिन चुप रह न सकोगे
देख हमें ग़मगीन सचिन तुम भी रो दोगे
बेशक़ कल कुछ और खिलाड़ी भी आएँगे
लेकिन क्या तुम जैसे रुतबे को पाएँगे

धोनी के हत्थे लगे, हेड या कि फिर टेल
सब की ख़्वाहिश है यही, सचिन न होवे फेल
सचिन न होवे फेल आख़िरी इम्तिहान है
उस का जिस का दीवाना हिंदोसतान है
घर का है मैदान बउंड्री भी क़रीब है
बाकी तो अब तेंदुलकर का भी नसीब है 

:- नवीन सी. चतुर्वेदी

नव-कुण्डलिया छन्द

1 comment:

  1. बहुत बढ़िया यादगार कुण्डलियाँ !
    नई पोस्ट लोकतंत्र -स्तम्भ

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