28 February 2014

होली और भाँग - नवीन

सामान्यत: होली का ज़िक्र छिड़ते ही भाङ्ग की चर्चा भी हो ही जाती है। अनेक बातें सुनने को मिल जाएँगी कि फलाँ जगह फलाँ ने पिला दी थी और भैया पूछो मत क्या हाल हुआ था उस के बाद। हँसते ही जा रहे थे हम, खाते ही जा रहे थे हम ..... वग़ैरह वग़ैरह।

एक मिनट का ब्रेक ले कर ज़रा दूसरे एङ्गल से इस  बात को समझने की कोशिश करते हैं। हमारा उद्देश्य भाङ्ग को प्रमोट करना नहीं है बस भाङ्ग के बारे में प्रचलित भ्रांति को दूर करने का प्रयास मात्र है।

फर्ज़ करें कि आप ने कभी दारू नहीं पी है। आप नहीं जानते दारू कितनी तरह की होती हैं। कितनी मात्रा ठीक होती है और उस के पीने की विधि क्या होती है। किसी दोस्त के कहने पर या अपना मन मलङ्ग होने पर आप ने उठाई बोतल और चढ़ा गये गटागट...... अब सोचो आप का क्या हाल होगा? बहुत मुमकिन है कि आप किसी नाली में गिरे पड़े भी मिल सकते हैं।

हमारे औषधि-साहित्य के अनुसार भी भाङ्ग एक औषधि है बशर्ते कि उस का उपभोग समझ कर किया जाये। सब से पहले हमें इस की गुणवत्ता पर ध्यान देना चाहिये, कहीं ऐसा तो नहीं कि भाङ्ग में अफ़ीम का पानी मिला कर या धतूरे के बीज डाल कर उसे अधिक नशीला बना दिया गया हो। दूसरी बात यदि हम पहली बार भाङ्ग पी रहे हैं तो एक दम कम मात्रा में इस का सेवन करें। यहाँ ध्यान रहे उस जगह भाङ्ग का सेवन कदापि न करें जहाँ ऐसा करने से अन्य व्यक्तियों को असुविधा का अनुभव हो या ऐसा करने से हम किसी नियम को तोड़ते हुये प्रतीत हों। तीसरी बात भाङ्ग के सेवन के बाद शौच जाना अनिवार्य होता है जो कि एक हज़ार में से नौ सौ निन्यानवें लोग नहीं करते, और सर भारी होने का रोना रोते रहते हैं। ऐसा करने से पेट में ख़ुश्की नहीं होती, बल्कि यह क्रिया पाचन तन्त्र को और अधिक कारगर करने में मददगार साबित होती है। चौथी बात भाङ्ग सेवन के बाद, शौच के बाद - कम से कम एक घण्टे के अन्तराल के बाद ही खाना खाएँ। अमूमन लोग भाङ्ग को दारू की तरह ट्रीट करते हैं और जिस तरह दारू के साथ चखना खाया जाता है भाङ्ग के साथ भी अल्ल-मल्ल ढकोसने लगते हैं। इन बातों का यदि ध्यान रखा जाये तो भाङ्ग हमारे शरीर को स्वस्थ बनाने में मददगार साबित हो सकती है।


कोई पूछ सकता है कि भाई इतने सारे पेरामीटर कौन ध्यान रखे और कैसे समझे? तो भाई पहली बात ये कि नशा दारू का हो या भाङ्ग का कोई ज़रूरी थोड़े होता है, काहे को नशा करते हैं? और अगर करते हैं तो सोच-समझ कर करें। ख़ुद नहीं जानते तो पहली बार का सेवन किसी शुभ-चिन्तक परिचित की उपस्थिति में ही करें। भाङ्ग को गाली न दें। 

3 comments:

  1. नशे से परहेज करें, अपना ख्याल खुद रखें - होली को रंगों से खुशियाँ दें

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  2. शिवजी की इस प्रसादी को प्रसाद जितना ही ग्रहण करना उचित है

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