30 November 2014

उठा के हाथ में खञ्जर मेरी तलाश न कर - नवीन

उठा के हाथ में खञ्जर मेरी तलाश न कर
अगर है तू भी सिकन्दर मेरी तलाश न कर

दरस-परस के सिवा कौन जान पाया मुझे
मुझी से आँख चुरा कर मेरी तलाश न कर

अगर सुगन्ध की मानिन्द उड़ नहीं सकता
तो घर में बैठ बिरादर मेरी तलाश न कर

अभी अँधेरों के दर तक ज़िया नहीं पहुँची
हसीन रात के लश्कर मेरी तलाश न कर

मैं वो हूँ जिस को अनासिर सलाम करते हैं
ख़ला के खोल के अन्दर मेरी तलाश न कर

किसी के दिल को दुखाना मुझे दुखाना है
किसी के दिल को दुखा कर मेरी तलाश न कर

मैं ख़ुद ख़ुदा हूँ कहीं भी रहूँ मेरी मरज़ी

तू सिर्फ़ अपनी डगर पर मेरी तलाश न कर

:- नवीन सी. चतुर्वेदी 


बहरे मुजतस मुसमन मख़बून महज़ूफ
मुफ़ाइलुन फ़इलातुन मुफ़ाइलुन फ़ेलुन
1212 1122 1212 22  

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काव्य गुरु
प्रात: स्मरणीय परमादरणीय कविरत्न स्व. श्री यमुना प्रसाद चतुर्वेदी 'प्रीतम' जी

काव्य गुरु <br>प्रात: स्मरणीय परमादरणीय कविरत्न स्व. श्री यमुना प्रसाद चतुर्वेदी 'प्रीतम' जी
जन्म ११ मई १९३१
हरि शरण गमन १४ मार्च २००५

My Bread and Butter

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