और हम दुःख की तरफ आँख तरेरे जाएँ
बस उसी ओर नयन धूप के फेरे जाएँ
माना कि तुझसा है नहीं तैराक
यार देख
इस फील्ड में है तू बड़ा ही
होनहार देख
लेकिन ज़माने पर नहीं है एतबार देख
समकालीन हिन्दी काव्य में युगल-स्वर या संवाद-आधारित काव्य-संरचना अत्यंत विरल है। “चाँद अब हरा हो गया है”—अनामिका कनौजिया ‘प्रतीक्षा’ और के.पी. अनमोल का संयुक्त काव्य-संग्रह—इस दृष्टि से हिन्दी में एक विशिष्ट और उल्लेखनीय प्रयोग के रूप में सामने आता है।
फूल अपने हार पर
भारी पड़ा
सुर मधुर झंकार
पर भारी पड़ा
हाथ ख़ुद पतवार पर
भारी पड़ा
"काम
ज़िम्मेदार पर भारी पड़ा
यार का ग़म यार पर भारी पड़ा"