हिन्दुस्तानी-साहित्य सेवार्थ एक शैशव-प्रयास
आवरण मन के सारे हटा दीजिए
आवरण युक्त मन मिल सकेंगे नहीं
बाग़ सम्वेदना के लगेंगे मगर
प्यार के फूल तो खिल सकेंगे नहीं