हिन्दुस्तानी-साहित्य सेवार्थ एक शैशव-प्रयास
सदमात हिज्रे-यार के जब जब मचल गए
आँखों से अपने आप ही आँसू निकल गए
मुश्किल नहीं था वक़्त की ज़ुल्फ़ें संवारना
तक़दीर की बिसात के पासे बदल गए