दधि माखन नित लूटि कै, देवे
मटकी फोर।
बाँधै ऊखल सौं कसे, जसुदा माखन चोर।।
नरम देह कनु की भई, रसरी गरि कै लाल।
अँखियन तें अँसुवा झरैं, गरम हु’इ गवा भाल।।
बाँधै ऊखल सौं कसे, जसुदा माखन चोर।।
नरम देह कनु की भई, रसरी गरि कै लाल।
अँखियन तें अँसुवा झरैं, गरम हु’इ गवा भाल।।
सोने-चाँदी री झंँकार, गहना-गठ्ठा, लाल-पीळा जोड़ा, बींदणी असी सजली लागी जणों कोई देवी मूर्त्ति हो।