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बुन्देली गजल - नाय-माय की बातें कर रै - विवेक मिश्र

 


नाय-माय  की    बातें  कर रै

ठलुआ सारे   इतइं   पबर  रै

हिन्दी गजल - प्रणय प्रस्तावना स्वीकार कर लो - विवेक मिश्र

 


प्रणय प्रस्तावना  स्वीकार कर लो 

हृदय की कामना स्वीकार कर लो

ग़ज़ल - समय के साथ चलना पड़ रहा है - विवेक मिश्र

 


समय के साथ चलना  पड़ रहा है

सो अब सूरज को ढलना पड़  रहा है

हिन्दी गजल - बलवती होती व्यथायें क्या करें - विवेक मिश्र

 


बलवती होती  व्यथायें    क्या करें 

खत्म  हैं   संभावनायें     क्या करें

 

आ गईं होकर विवश कुरुक्षेत्र तक

पांडवों  की  याचनायें    क्या करें