हिन्दुस्तानी-साहित्य सेवार्थ एक शैशव-प्रयास
उसने तुमको क्या कुछ दे के नवाज़ा है
क्या तुमको इस बात का कुछ अंदाज़ा है
हासिल है हर चीज़ न जाने क्यूँ फिर भी
सबके लबों पर कोई न कोई तक़ाज़ा है