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अवधी लोकगीत – गवनवां हम कबहुँ न जइबे – कुसुम तिवारी ‘झल्ली’

 

सुनी ल हो बाबुल अर्जियां

गवनवां हम कबहुँ न जइबे

माई के कोरवा में रहिबे

गवनवां हम कबहुँ न जइबे

माई के अचरा में रहबै

गवनवां हम कबहुँ न जइबे