साहित्यम्
हिन्दुस्तानी-साहित्य सेवार्थ एक शैशव-प्रयास
Aslam Hasan
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ग़ज़ल - जवाँ अब हो गया बेटा वो ऊँचा बोल सकता है – असलम हसन
जवाँ अब हो गया बेटा वो ऊँचा बोल सकता है
यही है मसलहत वरना ये बूढ़ा बोल सकता है
मेरी नानी के मरते ही ज़ुबाँ ख़ामोश है इसकी
न मैना बोल सकती है
,
न तोता बोल सकता है
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