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ग़ज़ल - जवाँ अब हो गया बेटा वो ऊँचा बोल सकता है – असलम हसन

 

 
जवाँ अब हो गया बेटा वो ऊँचा बोल सकता है
यही है मसलहत वरना ये बूढ़ा बोल सकता है
 
मेरी नानी के मरते ही ज़ुबाँ ख़ामोश है इसकी
न मैना बोल सकती है, न तोता बोल सकता है