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चौपाई छंद - श्रद्धा पाठक 'स्वस्ति'

 

कोरे - कोरे क्यों बनवारी ।

ढूँढे आज गोपियाँ सारी।।

कहाँ छुपे हो कान्हा छलिया।

रंग साँवरा ले साँवलिया।।

गीत - निज को कभी नहीं बहकाना - श्रद्धा पाठक ‘स्वस्ति’

 
 (अरिल्ल छन्द आधारित गीत)

(आधार छंद - अरिल्ल छंद, कुल – संस्कारी, 16 मापनी का सममात्रिक छंद, चरणान्त - 122/11)

 

निज को कभी नहीं बहकाना

माया देख नहीं भरमाना