हिन्दुस्तानी-साहित्य सेवार्थ एक शैशव-प्रयास
आधी अधूरी ज़िंदगी आपस में बाँट ली
बुझते दियों ने रोशनी आपस में बाँट ली
सब कुछ ख़ुदा पे छोड़ के दोनों हैं मुतमईन
उम्मीद जो थी आख़िरी आपस में बाँट ली