साहित्यम्
हिन्दुस्तानी-साहित्य सेवार्थ एक शैशव-प्रयास
Pushpendra 'Pushp'
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हिन्दी गजल - मैं मरुथल, वो सावन होता – पुष्पेन्द्र ‘पुष्प’
मैं
मरुथल
,
वो
सावन होता
ये
अनुपम
संयोजन
होता
उर
में
भाव
उमड़ते
रहते
आँखों
से
अनुमोदन होता
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