हिन्दुस्तानी-साहित्य सेवार्थ एक शैशव-प्रयास
ऊपर अंबर मौन है, नीचे धरती शांत।
मोबाइल में ढूँढ़ता, पागल मन विश्रांत।।
तसव्वुर लाज़िमी है जिस तरह तस्वीर से पहले
तख़य्युल लाज़िमी है जिस तरह तामीर से पहले
इरादा लाज़िमी है जिस तरह तदबीर से पहले
न जाना कि आँसू बहाता है कोई
न जाना कि ग़म को छुपाता है कोई