हिन्दुस्तानी-साहित्य सेवार्थ एक शैशव-प्रयास
किसी दिन
किसी कविता में
मैं लिखूँगी उन तमाम औरतों की जीवनी
जो नज़रबंद थीं
इन ऊँची ऊँची
किलों की दीवारों के पीछे