अपने ही कहने लगें, जाओ अब तो दूर ।
तब लगती है चोट जब, दिखता गहन गरूर।।
बूढ़ा तन-मन सोच में, होता
है बेचैन।
तब होती है पीर जब, सुनता तीखे बैन।।
अपने ही कहने लगें, जाओ अब तो दूर ।
तब लगती है चोट जब, दिखता गहन गरूर।।
बूढ़ा तन-मन सोच में, होता
है बेचैन।
तब होती है पीर जब, सुनता तीखे बैन।।