न जाने कब से कहा जा रहा था कि 21 दिसंबर 2012 को दुनिया तहस-नहस हो जायेगी। वैसा तो कुछ नहीं हुआ। मगर हाँ, हमारी अस्मिता, हमारी सभ्यता, हमारे संस्कार ज़ुरुर टुकड़ा-टुकड़ा हो गये। दामिनी के प्रसंग को ले कर तमाम हल्कों में अमूमन सब ही अपनी-अपनी राय ज़ाहिर कर रहे हैं। दर्ज़ किए गए मामलात को आधार बनाएँ तो हर 54वें मिनट में एक बलात्कार हो रहा है... इस तरह दर्ज़ न हो पाने वाले केसेस को भी अनुमानित आधार पर यानि दस गुना जोड़ें तो लगभग हर 5 मिनट में एक बलात्कार हो रहा है यानि हर दिन क़रीब-क़रीब 250। आँकड़ों के शोधकर्ता इसे अपने नज़रिये से यानि अरबों की जनसंख्या से जोड़ कर