हिन्दुस्तानी-साहित्य सेवार्थ एक शैशव-प्रयास
सोच रहा सुधुआ
धरती भूले आसमान में
ठहरे नेताजी.
सुविधाओं के लहरताल में
लहरे नेता जी.के
कोयल की अमराई
कौओं के नाम
बन्धु इस व्यवस्था को
कोटिशः प्रणाम
मौन नहीं रहिए -
उजियाले की हार देखकर
मौन नहीं रहिए.
अखबारों के खोजी-खबरी
सम्पादक चुप हैं.
जन-जीवन की व्यथा-कथा के -
अनुवादक चुप हैं.