भारतीयता के मूल तत्व से ओत-प्रोत व्यक्तित्व यानि रमेश कँवल
एक नायाब पेशकश - 2024 की दिलकश ग़ज़लें
25 अगस्त, 1953 को जितौरा ,पियरो,आरा , बिहार में जन्मे आदरणीय रमेश कँवल जी भी उन चुनिन्दा लोगों में शामिल हैं जिनकी कि ऊर्जा कोविड के बाद कई गुना बढ़ गयी. कोविड की त्रासदी को दरकिनार करते हुए आप ने ईसवी सन 2021 में विभिन्न शायरों द्वारा
वंदन शुभ अभिवन्दन - रमेश कँवल
रमेश कँवल - लीक से हटकर चलने वाले व्यक्ति
सबसे पहले 2020 की नुमाइन्दा ग़ज़लों का संकलन प्रकाशित किया . उसके बाद इक्कीसवीं सदी के इक्कीसवें साल की बेहतरीन ग़ज़लों का संकलन प्रस्तुत किया . तीसरे नम्बर पर एक रुकनी अनूठी ग़ज़लों का संकलन निकाला और अब स्वतंत्रता के 75 वें वर्ष में 75 चुनिन्दा रदीफ़ों पर ताबिन्दा ग़ज़लों के
साथ दस्तक दी है
आज के दौर में जहाँ नये लोगों से मात्र दो या चार रचनाएँ छापने के लिए साझा संकलन
के नाम पर लोग हज़ार पाँच सौ रुपये बेझिझक माँग लेते हैं वहीं रमेश कँवल जी ने अनेक
शायरों / शायराओं को देश के कोने कोने तक बिना
एक भी पैसा लिए पहुँचाने का पुण्यकर्म किया है ।
रमेश कँवल जी स्वयं भी एक सिद्धहस्त शारदात्मज हैं । विषय के जानकार हैं और उनकी
ग़ज़लें तमाम पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रहती हैं । इनकी कुछ ग़ज़लों को ग़ज़ल गायकों
ने गाया भी है । रमेश जी अपने काव्यगुरु श्री हफ़ीज़ बनारसी जी की स्मृति में सालाना
जलसे भी करवाते रहते हैं ।
रमेश जी के काम को एक पोस्ट में समेट पाना बहुत कठिन है । इनके प्रयासों के गाम्भीर्य को समझने के लिए इनके
उपरोक्त संकलनों को पढ़ना चाहिए । जहाँ एक ओर रमेश जी ने शायरी की भरपूर ख़िदमत की है
वहीं दूसरी ओर इन्होंने राष्ट्र गौरव के प्रतीकों, गाथाओं
और उद्धरणों को अपने संकलनों में प्रमुखता से स्थान दिया है ।
रमेश
जी का पता और मोबाइल नम्बर
रमेश
कँवल
6, मंगलम विहार कॉलोनी, आरा
गार्डन रोड,
जगदेव
पथ, पटना –
800014
मोबाइल
- 8789761287
मैं अपने होठों की ताज़गी को तुम्हारे होठों के नाम लिख दूँ - रमेश प्रसाद कँवल
मैं अपने होठों की ताज़गी को तुम्हारे होठों के नाम लिख दूँ ।
हिना
से रौशन हथेलियों पर नज़र के दिलकश पयाम लिख दूँ ॥
अगर
इजाज़त हो जानेमन तो किताबे-दिल के हर इक वरक़ पर ।
मैं
सुबहे-काशी की रौशनी में अवध की मस्तानी शाम लिख दूँ ॥
बदन
पै सावन की है इबारत नज़र में दौनों की एक चाहत ।
मेरे लबों को जो हो इजाज़त वफ़ा का पहला सलाम लिख दूँ ॥
जो
दिलनशीं है सितम पै माइल उसे हर इक पल दुआएँ दूँ मैं ।
सुलगते
सूरज से दूर रखकर अमन-सुकूँ का क़याम लिख दूँ ॥
मसर्रतों
पै गहन प्रदूषण अवामी ख़ुशियाँ बिलख रही हैं ।
तुम्हीं
बताओ ऐ मेरे रहबर कहाँ से बेहतर निज़ाम लिख दूँ ॥
डिलीट
कर दूँगा उसके ग़म को मैं दिल के अब लैपटॉप से ही ।
ख़ुशी
के जितने मिले हैं DATA उन्हें मैं दिलबर के नाम लिख दूँ ॥
रमेश
प्रसाद कँवल






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