हिन्दुस्तानी-साहित्य सेवार्थ एक शैशव-प्रयास
माघ का महीना था। ठंडी हवा सुइयों की तरह शरीर में चुभ रही थी। आसमान से उतरती ओस मानो धरती को और ठंडा करने पर तुली हो।