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आलेख - नदी और नारी की समानता – सुनीता चौधरी

नदी और नारी
, दोनों ही सृष्टि की जीवनदायिनी धारा हैं। दोनों का अस्तित्व मानव समाज और प्रकृति के लिए अपरिहार्य है।

लघुकथा - माघ की ठिठुरन में हरीराम की झोपड़ी – सुनीता चौधरी

 माघ का महीना था। ठंडी हवा सुइयों की तरह शरीर में चुभ रही थी। आसमान से उतरती ओस मानो धरती को और ठंडा करने पर तुली हो।