हिन्दुस्तानी-साहित्य सेवार्थ एक शैशव-प्रयास
हर एक शय में नसीहत है आदमी के लिए
करो वो, जो भी ज़रूरी है ज़िन्दगी के लिए
ज़रूर होता है पीछे छुपा कोई मक़सद
फ़िज़ूल करता नहीं कोई कुछ किसी के लिए