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नज़्म - सारिफ़ीयत (कंज्यूमरिज्म) – शाहिद लतीफ़

 


चराग़दान था, कन्दील थी, सुराही थी
दुलाईयाँ थीं, रजाई थी, चारपाई थी
एक इत्रदान था, एक पानदान, एक गुलदान
एक आफ़ताबा, नमकदान, एक दस्तर-ख़्वान