कई शब्द लिखि लिखि के काटल रहे
तबो गम न रचना में आँटल रहे
भरल दुःख के गगरी से घर बा भरल
एही से त मनवा उचाटल रहे
मिलन,बेवफाई,जुदाई,तड़प
सफर केतना हिस्सा में बाँटल रहे
कहीं का कहानी ल एतने समझ
मोहब्बत के पन्ना भी फाटल रहे
‘सिकन्दर’ के कोशिश भइल ना सफल
कि नेहिया से धरती ई पाटल रहे
बहरे मुतक़ारिब मुसम्मन मक़्सूर
फ़ऊलुन फ़ऊलुन फ़ऊलुन फ़उल
122 122 122 12
दिल में हलचल मचवले बा काहो
चाँद पागल बनवले बा काहो
एतना बेकल तू कहँवा जातारा
केहू अँखिया बिछौले बा काहो
तू अकेले में मुस्कुरातारा
फूल बिजली गिरवले बा काहो
पाँव थिरके के समझीं का मतलब
नाच नेहिया नचवले बा काहो
काहे अइसे चिहुँक के उठ गइला
नींद, सपना
उड़वले बा काहो
बहरे खफ़ीफ मुसद्दस मख़बून
फ़ाइलातुन मुफ़ाइलुन फ़ेलुन
2122 1212 22
ख्वाहिश बा कवनो अइसने जादू देखाई दे
हम देखीं आइना त उहे ऊ देखाई दे
अइसे ऊ हमरा याद में आवस कबो कबो
जइसे अन्हरिया रात में जुगनू देखाई दे
अइसे भी ज़िंदगी में त आवेला केतना लोग
जइसे केहू के आँखि में आँसू देखाई दे
बाटे हो रोम-रोम में खुशबू वो फूल के
चाहेला मन कि सामने खुशबू देखाई दे
पावे करार कइसे ई मोर बेकरार
दिल
कवनो न उनके दीद के पहलू देखाई दे
बहरे मज़ारिअ मुसमन अख़रब मकफूफ़ मकफूफ़ महज़ूफ़
मफ़ऊलु फ़ाइलातु मुफ़ाईलु फ़ाइलुन
221 2121 1221 212
कोरे कागज पे प्यार लिखि लिखि के
ऊ मिटावेला यार लिखि लिखि के
रास आ गइल बाटे पतझड़ का
काट देला बहार लिखि लिखि के
चाँदनी रात के बिछौना पर
सुत गइल ऊ अन्हार लिखि लिखि के
आज ले कुछ जवाब ना आइल
चिट्ठी भेजनीं हजार लिखि-लिखि के
चल ‘सिकन्दर’ तें काहें रोवेले
दुःख के बोझा उतार लिखि लिखि के
बहरे खफ़ीफ मुसद्दस मख़बून
फ़ाइलातुन मुफ़ाइलुन फ़ेलुन
2122 1212 22
इरशाद खान सिकन्दर
9818354784