हिन्दुस्तानी-साहित्य सेवार्थ एक शैशव-प्रयास
हरियाली हँसती आई,
लाल गुलाबी कलियों ने
देखो मस्ती खूब मचाई।
मेरे प्यारे मामा जी ।
खेला करते ड्रामा जी ।।
रावण बनते कभी-कभी ,
बनते कभी सुदामा जी ।
बिल्ली बोली शेर बनूँगी
बिना किए कुछ देर बनूँगी
आने को दीपावली, हो जाओ तैयार।
करें सफाई हर तरफ़ , करते ज्यों हर बार।।
आये घर पर आज हमारे दिल्ली वाले दादाजी ।
दादाजी के भाई प्यारे दिल्ली वाले दादाजी ।।
खाने वाली चीजें लाये , ढेरों खेल-खिलौने भी।
भूआ के जो नन्हा - मुन्ना उसके लिए बिछौने भी,