हृद्यमादौ च वेदनामन्ते
मादृशा ब्रूहि के समीहन्ते
इन्द्रजालं प्रवर्तते
मित्र
सर्षपा यत्करे विजायन्ते
शास्त्रभारोन्मदा विराजन्ते
नायका शाठ्यचातुरीसिद्धा
लोकलोका नतानुवर्तन्ते
ज्ञातमद्यैव तद्रहस्यं यद्
वञ्चकास्ते प्रियं
विभाषन्ते
केचिदट्टालिकासु भव्यासु
तत्र खर्वा मुदा
विराजन्ते
कीदृशा मे मनोरथा मित्र
चोत्पद्यैव हा
विलीयन्ते
प्रत्यवायाश्च
स्वप्नभङ्गाश्च
वर्तमानेसधुना समेधन्ते
ये म्रियन्तेत्र जीवितुं
लोके
मत्समाः के च कुत्र वर्तन्ते

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
टिप्पणी करने के लिए 3 विकल्प हैं.
1. गूगल खाते के साथ - इसके लिए आप को इस विकल्प को चुनने के बाद अपने लॉग इन आय डी पास वर्ड के साथ लॉग इन कर के टिप्पणी करने पर टिप्पणी के साथ आप का नाम और फोटो भी दिखाई पड़ेगा.
2. अनाम (एनोनिमस) - इस विकल्प का चयन करने पर आप की टिप्पणी बिना नाम और फोटो के साथ प्रकाशित हो जायेगी. आप चाहें तो टिप्पणी के अन्त में अपना नाम लिख सकते हैं.
3. नाम / URL - इस विकल्प के चयन करने पर आप से आप का नाम पूछा जायेगा. आप अपना नाम लिख दें (URL अनिवार्य नहीं है) उस के बाद टिप्पणी लिख कर पोस्ट (प्रकाशित) कर दें. आपका लिखा हुआ आपके नाम के साथ दिखाई पड़ेगा.
विविध भारतीय भाषाओं / बोलियों की विभिन्न विधाओं की सेवा के लिए हो रहे इस उपक्रम में आपका सहयोग वांछित है. सादर.