9 October 2019

माँ सरस्वती के चालीस नाम वाली सरस्वती वन्दना - नवीन

हे मरालासन्न वीणा-वादिनी माँ शारदे।
वागदेवी, भारती, वर-दायिनी माँ शारदे॥ 

श्वेत पद्मासन विराजित, वैष्णवी माँ- शारदे। 
हे प्रजापति की सुता, शतरूपिणी माँ शारदे।। 

चंद्रिका, सुर-वंदिता, जग-वंदिता, वागेश्वरी। 
कामरूपा, चंद्रवदना, मालिनी माँ शारदे॥ 

अम्बिका, शुभदा, सुभद्रा, चित्रमाल्यविभूषिता। 
शुक्लवर्णा, बुद्धिदा, सौदामिनी माँ शारदे॥ 

दिव्य-अंगा, पीत, विमला, रस-मयी, भामा, शिवा। 
रक्त-मध्या, विंध्यवासा, गोमती माँ शारदे॥ 

पद्म-निलया, पद्म-नेत्री, रक्तबीजनिहंत्रिणी। 
धूम्रलोचनमर्दना, अघ-नासिनी माँ- शारदे॥ 

हे महाभोगा, परा, पथभ्रष्ट जग सन्तप्त है। 
वृष्टि कीजै प्रेम की, अनुराग की माँ शारदे॥

नवीन सी चतुर्वेदी

5 October 2019

विष्णु की विराटता में शारदे कौ वास है - नवीन चतुर्वेदी

थके भए मानव की थकन मिटान हारी,
सिन्धु की सरलता में शारदे कौ वास है।

अग्नि-वर्णा धातु धार शीतल हॄदय होंय, 
स्वर्ण की विविधता में शारदे कौ वास है।

सत्य, शान्ति, शील, धैर्य मातु शारदे की दैन,
प्रति एक शुचिता में शारदे कौ वास है।

कल्पना विहीन विश्व कैसें विसतार पातो,
विष्णु की विराटता में शारदे कौ वास है।। 

नवीन सी चतुर्वेदी 

सरस्वती वन्दना, घनाक्षरी छन्द