28 February 2014

हाइकु - विभा रानी श्रीवास्तव

ज्ञान का लोप
पाशविकाचरण
मृत समाज

गिरि वसन 
धूसर अँगरखा 
उजली टोपी 

4 comments:

  1. Replies
    1. शुक्रिया और आभार आपलोगो का

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  2. भाव और समर्थ मानस का विभव दिखा इन हाइकू में – मेरा मानना सही सबित हुआ कि अच्छे हाइकू कहने वाले की आइक्यू ज़ियादा होती है – हाथ कंगन को आरसी क्या !!! विभा जी बहुत बहुत बधाई –गागर में सागर भर दिया आपने !! –मयंक

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  3. बढ़िया प्रस्तुति !

    श्रेष्ठ हाइकु हैं...

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काव्य गुरु
प्रात: स्मरणीय परमादरणीय कविरत्न स्व. श्री यमुना प्रसाद चतुर्वेदी 'प्रीतम' जी

काव्य गुरु <br>प्रात: स्मरणीय परमादरणीय कविरत्न स्व. श्री यमुना प्रसाद चतुर्वेदी 'प्रीतम' जी
जन्म ११ मई १९३१
हरि शरण गमन १४ मार्च २००५

My Bread and Butter

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