26 February 2012

मुहावरों पर दोहे - आ. सलिल

दोहा कहे मुहावरा, सुन-गुन समझो मीत.
इसमें सदियों से बसी, जन-जीवन की रीत..
*
पानी-पानी हो गये, साहस बल मति धीर.
जब संयम के पल हुए, पानी की प्राचीर..

बहुत कुछ है ये दुनिया - अहमद 'सोज़'

इधर कुछ भी नहीं है
उधर कुछ भी नहीं है

उधर हम जा रहे हैं
जिधर कुछ भी नहीं

उजाला ही न हो जब
नज़र कुछ भी नहीं है

मुसम्मम हो इरादा
सफ़र कुछ भी नहीं है

न हो जलने का सामाँ
शरर कुछ भी नहीं है

फ़क़त एक वाहिमा है
ये डर कुछ भी नहीं है

अगर सूरज न निकले
सहर कुछ भी नहीं है

न हों जिस घर में खुशियाँ
वो घर कुछ भी नहीं है

बहुत कुछ है ये दुनिया
मगर कुछ भी नहीं है

अगर हों बोल मीठे
शकर कुछ भी नहीं है

ये तेरा हुस्नेताबां
क़मर कुछ भी नहीं है

हो दौलत इल्म की तो
गुहर कुछ भी नहीं है

है नाक़द्री यहाँ, अब
हुनर कुछ भी नहीं
 
:- अहमद 'सोज़'

ऋतुराज को आना पड़ा है - ऋता शेखर 'मधु'

फिर वाटिका चहकी खुशी से,खिल उठे परिजात हैं।
मदहोशियाँ फैलीं फ़िजाँ में, शोखियाँ दिन रात हैं।।
बारात भँवरों की सजी है, तितलियों के साथ में।
ऋतुराज को आना पड़ा है, बात है कुछ बात में ।१। 

14 February 2012

अष्ट विनायक दर्शन

दिवाली की छुट्टियों में इस बार मित्र मंडली के साथ अष्ट विनायक दर्शन को गए| अष्ट विनायक मंदिरों में फोटो लेने की क़तई मनाही है| इस लिए फोटो सभी गूगल से साभार|





म्हण - वरद विनायक

पाली - बल्लालेश्वर




थेयुर - चिंतामणी

मोरगाम - मयुरेश
सिद्धटेक - सिद्धिविनायक 
राजण गाम - महागणपति
ओझर - विघ्नेश्वर
लेण्‍याद्री - गिरिजात्मक


म्हण में वरद विनायकं, पाली - बल्लालेश|
थेयुर में चिंतामणी, मोरगाम- मयुरेश|| 
मोरगाम - मयुरेश, ह्रदय में श्रद्धा धरिये|
सिद्धटेक  में सिद्धिविनायक दर्शन करिये|
राजणगाम - महागणपति, ओझर - विघ्नेश्वर|
लेण्‍याद्री - गिरिजात्मक, अष्ट विनायक सुन्दर||


दिवाली की छुट्टियों में इस बार मित्र मंडली के साथ अष्ट विनायक दर्शन को गए| अष्ट विनायक मंदिरों में फोटो लेने की क़तई मनाही है| इस लिए फोटो सभी गूगल से साभार|